आय जो तेरी याद कभी ,
झिलमिलाती पलकों से कुछ सितारे तोड़ लेता हूँ |
फिर पलेट कर उनको खत में ,
तेरी तस्वीर के पीछे छोड़ देता हूँ |
जो न दिखे एक दिन भी तो उदास हो जाता हूँ ,
जो हो जाय मुलाकात तो ,
कभी जी भर के देख लेता हूँ ,
कभी निगाहें मोड़ लेता हूँ |
एक माँ की दो संताने ,एक ही घर मे रहें, हो कर अनजाने |सब भूल कर आओ ,हम फिर से प्रेम पहचाने |चलो फिर से पुराना कल ले आएं,पुराने प्यार से एक नई रीत बनाये |स्नेह और भाईचारे की,ये नई रीत मुबारक,मुझे तुम मुबारक, तुम्हें ईद मुबारक ।