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तेरा दीद

हाँ किसी मोड़ पर तेरा दीद हो जाय
तो सूखता दरया आँखों का नीला हो जाय।
तुझे जी भर के देखु ,और यू देखूं
के अश्क भी  न निकले और काजल गीला हो जाय।

न तुझे पता चला न मूझे


मेरी ना में भी हाँ थी , तेरी हाँ में भी ना थी,
न तुझे पता चला , न मूझे,
शायद तकदीर का यही इरादा था | 

कुछ देर साथ चले , बस इसी में खुश थे,
ना मेरी दूर तलक की चाहत थी , 
ना तेरा ऐसा वादा था।
न तुझे पता चला , न मूझे,
शायद तकदीर का यही इरादा था | 

तू मेरे बिन खुश है , मैं तेरे बिन खुश हूँ ,
ना मुझे खलिश कोई, ना तुझे गिला कोई,
तेरा मेरा  रिश्ता, 
कितना पाक,कितना सादा था
न तुझे पता चला , न मूझे,
शायद तकदीर का यही इरादा था | 

तू मुझे कुबूल था , मैं तुझे कुबूल थी।
ना मैंने पूछा क्या है , ना तूने बताया ,
ये इश्क़ था ,
तेरा भी आधा था , मेरा भी आधा था
न तुझे पता चला न मूझे
वक़्त का शायद  यही तकाजा था |