एक माँ की दो संताने ,एक ही घर मे रहें, हो कर अनजाने |सब भूल कर आओ ,हम फिर से प्रेम पहचाने |चलो फिर से पुराना कल ले आएं,पुराने प्यार से एक नई रीत बनाये |स्नेह और भाईचारे की,ये नई रीत मुबारक,मुझे तुम मुबारक, तुम्हें ईद मुबारक ।
एक माँ की दो संताने ,
एक ही घर मे रहें, हो कर अनजाने |
सब भूल कर आओ ,
हम फिर से प्रेम पहचाने |
चलो फिर से पुराना कल ले आएं,
पुराने प्यार से एक नई रीत बनाये |
स्नेह और भाईचारे की,ये नई रीत मुबारक,
मुझे तुम मुबारक, तुम्हें ईद मुबारक ।
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