रंग से बेरंग ,बेरंग से रंगीन हो के देखा ,कभी सीधी साधी अल्हड़ ,कभी बला की हसीन हो के देखा ,पर किसी भी सूरत वो मेरा न हुआ |Follow me on instagram : https://www.instagram.com/ahalfbook
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मेरा न हुआ
यूँ ही 1
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मैं चाँद भी तोड़ लाउं ,तो तेरे चेहरे पे हँसी नही खिलती
वो दिया भी जला दे ,तो तेरा चेहरा आफताब हो जाय।
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मैं तमाम उम्र कोशिशों में लगा रहा, तेरी आंख का तारा बन पाऊं
ना कभी तेरी निगाह ने सराहा मुझे ,ना मेरी रूह ने ।
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ता उम्र एक मुखोटा पहन के जीय
ना तुझे पता चला न मुझे ।
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जिंदगी तुझे मुझसे कोई शिकायत है तो बता।
आज खुद पर मुक़दमा किया है मैने।
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