A half Book
तेरी याद
आय जो तेरी याद कभी ,
झिलमिलाती पलकों से कुछ सितारे तोड़ लेता हूँ |
फिर पलेट कर उनको खत में ,
तेरी तस्वीर के पीछे छोड़ देता हूँ |
जो न दिखे एक दिन भी तो उदास हो जाता हूँ ,
जो हो जाय मुलाकात तो ,
कभी जी भर के देख लेता हूँ ,
कभी निगाहें मोड़ लेता हूँ |
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