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यूँ ही 1

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मैं चाँद भी तोड़ लाउं ,तो तेरे चेहरे पे हँसी नही खिलती
वो दिया भी जला दे ,तो तेरा चेहरा आफताब हो जाय।
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मैं तमाम उम्र कोशिशों में लगा रहा, तेरी आंख का तारा बन पाऊं
ना कभी तेरी निगाह ने सराहा मुझे ,ना मेरी रूह ने ।
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ता उम्र एक मुखोटा पहन के जीय
ना तुझे पता चला न मुझे ।
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जिंदगी तुझे मुझसे कोई शिकायत है तो बता।
आज खुद पर मुक़दमा किया है मैने। 
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न तुझे पता चला न मूझे


मेरी ना में भी हाँ थी , तेरी हाँ में भी ना थी,
न तुझे पता चला , न मूझे,
शायद तकदीर का यही इरादा था | 

कुछ देर साथ चले , बस इसी में खुश थे,
ना मेरी दूर तलक की चाहत थी , 
ना तेरा ऐसा वादा था।
न तुझे पता चला , न मूझे,
शायद तकदीर का यही इरादा था | 

तू मेरे बिन खुश है , मैं तेरे बिन खुश हूँ ,
ना मुझे खलिश कोई, ना तुझे गिला कोई,
तेरा मेरा  रिश्ता, 
कितना पाक,कितना सादा था
न तुझे पता चला , न मूझे,
शायद तकदीर का यही इरादा था | 

तू मुझे कुबूल था , मैं तुझे कुबूल थी।
ना मैंने पूछा क्या है , ना तूने बताया ,
ये इश्क़ था ,
तेरा भी आधा था , मेरा भी आधा था
न तुझे पता चला न मूझे
वक़्त का शायद  यही तकाजा था |