मेरी ना में भी हाँ थी , तेरी हाँ में भी ना थी,
न तुझे पता चला , न मूझे,
शायद तकदीर का यही इरादा था |
कुछ देर साथ चले , बस इसी में खुश थे,
ना मेरी दूर तलक की चाहत थी ,
ना तेरा ऐसा वादा था।
न तुझे पता चला , न मूझे,
शायद तकदीर का यही इरादा था |
तू मेरे बिन खुश है , मैं तेरे बिन खुश हूँ ,
ना मुझे खलिश कोई, ना तुझे गिला कोई,
तेरा मेरा रिश्ता,
कितना पाक,कितना सादा था
न तुझे पता चला , न मूझे,
शायद तकदीर का यही इरादा था |
तू मुझे कुबूल था , मैं तुझे कुबूल थी।
ना मैंने पूछा क्या है , ना तूने बताया ,
ये इश्क़ था ,
तेरा भी आधा था , मेरा भी आधा था
न तुझे पता चला न मूझे
वक़्त का शायद यही तकाजा था |
ना तुझे मेरी चाहत ना मुझे तेरा इंतज़ार फिर भी दोनों के दिल बेकरार
ReplyDeleteBhut khoob
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