खो ही दूंगा मैं उसे ज़फ़ा करके

खो ही दूंगा मैं उसे, ज़फ़ा करके, 
वो हासिल भी कहाँ है मुझे ,वफ़ा करके | 
जब भी देखा ,फासले से देखा ,
हसरत ही रही देखूं तुझे ,कभी जी भर के'| 
इस उलझन में दिल की बात दिल में ही रह गयी ,
के बोल दूंगा एक दिन ,होंसला कर के | 

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