शौख

अरसे लग जाय जिसे पाने में ,
ऐसा शौख देर तक कहाँ रहता है ,
मैं कब तक ठहरा रहु तेरे लिए ,
कभी कोई कभी कोई ,हमारे दरमियाँ रहता है | 

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क्या जीना इतना मुश्किल था




क्या जीना इतना मुश्किल था ,
के मौत ही, एक मात्र हल था ,
तुम्हे थोड़ा औऱ ठहरना था,
कह देना था , गर कुछ कहना था | 

माना मायूसीयों का दौर बड़ा था ,
पर अच्छा वक्त ,अगले मोड़ खड़ा था ,
बस तुमको चलते रहना था, 
थोड़ा लड़ना था, थोड़ा सहना था ।

क्या हुआ गर ,खो गयी थी शोहरत,
क्या हुआ गर, रो रही थी महोब्बत,
क्यो जरूरी जीतना, हर रण था ,
रो देना था ,गर रोने का मन था ।

सफलता असफलता तो चलती रहती है ,
ये तकदीर है दोस्त ,बदलती रहती है ,
वो जरूर मिलता ,अगर तेरा हक था ,
थोड़ा रुक कर देख लेते ,अगर शक था ।

कठिनाइयां तुझे कुछ सिखाने आई थी, 
तू उन्हीं पर दोष लगा गया
देख जरा तेरे घर में ,
कैसा मातम छा गया ।

वक्त कितना भी बुरा था, कट ही जाता,
तू थोड़ी हिम्मत करता, लड़ के दिखाता|


शायद जीना तो तुम भी चाहते थे, 
पर अकेले तेरे बस के, हालात नहीं थे,
कोई हौसला देता, कोई उम्मीद देता 
तुझे थाम लेते इस भँवर में, वो हाथ नही थे 


गले लगा के किसी ने नही कहा होगा,
मैं हूँ ना,फिक्र मत कर ,सब ठीक हो जाएगा

तेरी आँखों में रुके दरिया को किसी ने बहने ना दिया होगा
बहुत कुछ कहने गया होगा तू , पर किसी ने कहने ना दिया होगा

तेरी चुप्पी को हमने समझना ,जरूरी ना समझा,
इसलिये तूने जिंदगी से लड़ना, जरूरी ना समझा,

गलती सिर्फ तेरी नहीं , हम भी कुछ गुनहगार हैं
हमारे रहते तू चला गया , हम शर्मशार हैं


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क्या करें



दुश्मनों से जो बेहतर निकल गए ,
उन दोस्तों का क्या करें |
 
जो काम ही ना आए  कभी ,
उन हौसलों का क्या करें |
 
दूरियां होती तो दिल को समझा भी लेते ,
पास रह कर भी जो हो गए ,
उन फासलों का क्या करें |

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मेरा न हुआ



रंग से बेरंग ,बेरंग से रंगीन हो के देखा ,
कभी सीधी साधी अल्हड़ , 
कभी बला की हसीन हो के देखा ,
पर किसी भी सूरत वो मेरा न हुआ | 

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तेरी याद

आय जो तेरी याद कभी ,
झिलमिलाती पलकों से कुछ सितारे तोड़ लेता हूँ | 
फिर पलेट कर उनको खत में ,
तेरी तस्वीर के पीछे छोड़ देता हूँ | 

जो न दिखे एक दिन भी तो उदास हो जाता हूँ ,
जो हो जाय मुलाकात तो ,
कभी जी भर के देख लेता हूँ ,
कभी निगाहें मोड़ लेता हूँ | 

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